आर्मी रूल्स 19 और 21 की अनदेखी की, सेना का कानून तोड़ा
सेना का कोई भी अधिकारी या जवान नहीं दे सकता राजनीतिक बयान
जैसी मुझे सेना के अधिकारियों से बातचीत की जानकारी मिली है, उसके मुताबिक जनरल बिपिन रावत के राजनीतिक बयान को सेना की दृष्टि से गलत माना जा रहा है। सेना को राजनीति से दूर रहने का नियम है। यही कारण है कि उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया है। आर्मी की रूल्स बुक के रूल 21 में साफ लिखा गया है कि राजनीतिक सवालों के ऊपर कोई बयान सार्वजनिक तौर पर फौज के किसी भी सदस्य की ओर से नहीं आएगा। बयान देने के लिए केंद्र सरकार की इजाजत बहुत जरूरी है और नियम में लिखा है कि बिना इजाजत कोई भी फौजी या अधिकारी राजनीतिक मामलों पर बात नहीं कर सकता है।. सेना के हर जूनियर जवान से लेकर आर्मी चीफ तक के मौलिक अधिकारों को आर्मी रूल 19 के तहत सीमित किया गया है। यानी संविधान के तहत आम नागरिक को अभिव्यक्ति की जो स्वतंत्रता मिलती है, आर्मी रूल 19 के तहत उसे सेना से जुड़े लोगों के लिए कम किया गया है.आर्मी चीफ एक आम नागरिक नहीं हैं, वह सेना के सदस्य हैं और आर्मी के रूल 19 के तहत उन्हें ऐसा करने का अधिकार नहीं है। गौरतलब है कि सेना प्रमुख जनरल रावत ने दिल्ली मेंएक कार्यक्रम में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शन को विवादित बयान दिया है कि नेता को नेतृत्व से ही जाना जाता है. अगर आप प्रगति के रास्ते पर ले जाते हैं तो आपके पीछे हर कोई हो जाता है. नेता वही है जो लोगों को सही दिशा में ले जाता है. नेता वो नहीं होता जो अनुचित दिशा में ले जाए. हम देख रहे हैं कि कॉलेज और यूनिर्सिटी में जो विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं उनमें हिंसा और आगजनी हो रही है. यह कोई नेतृत्व नहीं है.।