शर्मीले राजकुमार प्रीतम को ठंड में आया जोश- मुंगेरी लाल के हसीन सपने देख रहे हैं कांग्रेसी
प्रदेश कांग्रेस की नेताओं के मुंह में ठंड की दही जमी है। देश और प्रदेश उबल रहा है लेकिन निकम्मे कांग्रेसियों के मंुह से बोल नहीं फूट रहा है। मुट्ठी भर कांग्रेसी नेता कुछ दिन पहले दिल्ली गये। पूरियां बांटते हुए फोटो खिंचवाई। राजघाट गये और फोटो खींची, सोशल मीडिया पर डाली, लाइक कमेंट लिये और खुश हो गये। जीवन की सांध्यवेला में सवा सौ साल पुरानी कांग्रेस का बोझ ढो रही सोनिया गांधी का भाषण सुना। अपने भावी नेता राहुल उर्फ पप्पू को सावरकर से तुलना करना सुना और वापस देहरादून लौट आए और सोचा कि उन्होंने भारत बचा लिया। कांग्रेस में यदि सूर्यकांत धस्माना और गरिमा दसौनी न हों तो कांग्रेस उत्तराखंड के परिदृश्य से गायब हो गयी होती। 72 वसंत पूरे कर चुके हरदा कभी आम, कभी ककड़ी, कभी गीठीं खाकर टाइम पास कर रहे हैं क्योंकि उन्हें सच्चाई पता है कि प्रदेश में अब कांग्रेस के पास न नेता हैं और न विजन। न कांग्रेसी रजाई छोड़कर सड़कों पर आने के लिए तैयार हैं। ऐसे में हरदा भी दारू का पैग पीते हुए या यूं कहें कि काली चाय और गीठीं का मजा ले रहे हैं। ऐसे ठंड के समय जब त्रिवेंद्र सरकार में चारों ओर लूट-मार मची है। त्रिवेंद्र सरकार की तुलना गजनवी और चंगेज खान से हो रही है। यहां तक कि प्रदेश सरकार की गिद्ध नजर तीर्थपुरोहितों के दान पर भी टिकी हुई है। निकम्मे कांग्रेसी रजाई ओढ़ कर सपना देख रहे हैं कि इन्हें सत्ता मिल गई है। मुंगेरी लाल बन गये हैं कांग्रेसी। वो सोच रहे हैं कि जनता जब भाजपा शासन से त्रस्त हो जाएंगे तो बदले में वोट उन्हें ही देंगे। क्योंकि यूकेडी समेत सभी क्षेत्रीय दल तो कहीं हैं ही नहीं। तो कांग्रेस के मंुगेरी लालो यदि शर्मीले राजकुमार ने कांग्रेस कमेटी भंग कर भी दी है तो होगा कुछ नहीं, केवल टाइमपास होगा। बेहतर है कि प्रीतम सिंह उर्फ शर्मिला राजकुमार गद्दी छोड़ दें।