- यूपी के युवा नेता ने खून से लिखा पत्र, मीडिया ने नहीं छापा एक शब्द
- पेयजल के एमडी भजन सिंह के भजन गा रही जीरो टोलरेंस सरकार
मेन स्ट्रीम मीडिया और त्रिवेंद्र सरकार के बीच गजब का गठजोड़ है। दोनों की जुगलबंदी इस तरह से है कि एक रोता है तो दूसरा आंसूं पोंछता है। एक औली में पाॅटी करता है तो दूसरा धोता है। त्रिवेंद्र सरकार के साथ मुख्यधारा के मीडिया के साथ ऐसे गजब के रिश्ते हैं। उत्तरांचल प्रेस क्लब को यदि स्मारिका या शौचालय के कमोड का लोकार्पण करना है तो सीएम साहब दौड़े चले आते हैं। वही हाल मुख्यधारा के मीडिया का है। सीएम त्रिवेंद्र यदि छींक भी मार दे ंतो मुख्यधारा के तथाकथित बड़े पत्रकार और उनके संपादक उस छींक को पवित्र मंत्रा हुआ जल समझ कर उसे अपनी आंखों और माथे पर लगा देते हैं। क्या इस मीडिया का काम सिर्फ विज्ञापन के बहाने सरकार के तलवे चाटना है। एक उदाहरण देता हूं, यूपी के प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अमित जानी ने देहरादून में प्रेस कांफ्रेंस की। मीडिया के सामने बताया कि किस तरह से नमामि गंगा का 700 करोड़ रुपये पेयजल निगम के एमडी भजन सिंह ने हड़प कर लिया। अमित ने बकायदा एक प्रकाशित पुस्तक भी जारी की जिसमें तथ्य, आरटीआई से मिली जानकारी से साबित हो रहा है कि भजन सिंह ने नमामि गंगे के तहत धांधली की है और अपने ही रिश्तेदार को सीवरेज प्लांट दे दिया है। अमित जानी ने मीडिया के सामने ही खून से प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की जांच कराने की मांग की। मुख्यधारा की मीडिया ने उसे नहीं छापा, क्यों? क्या वो खबर नहीं थी, कैसे तय कर लिया कि आरोप झूठे हैं? जब गुजरात का एक नेता बनारस में मां गंगा ने बुलाया है कहकर चुनाव लड़ता है और देश का प्रधानमंत्री बन जाता है तो क्या यूपी जहां गंगा बहती है, वहां का युवा उत्तराखंड में आकर त्रिवेंद्र सरकार से नमामि गंगे के घोटालों पर बात नहीं कर सकता? मुख्यधारा का मीडिया के संपादक और रिपोर्टर या तो पेयजल निगम के एमडी से रिश्वत खा चुके हैं या अपना जमीर बेच चुके हैं। त्रिवेंद्र रावत सरकार की जीरों टोलरेंस सरकार के ऐसे ही कई किस्से हैं, जिन्हें मुख्य धारा के मीडिया ने दबाने में पूरा सहयोग दिया है। यदि मीडिया ऐसा करता है तो लानत है ऐसे मीडिया पर।
त्रिवेंद्र सरकार और मुख्यधारा का मीडिया में गजब का गठजोड़