- तुर्क सेनापति बख्तियार खिलजी ने नालंदा को इसलिए नष्ट किया क्योंकि वे खिजली के सलाहकारों के मुकाबले अधिक ज्ञानी थे।
- क्या मोदी सरकार को भी यही डर सता रहा है कि जेएनयू के पास मोदी सेना से अधिक ज्ञानी लोग हैं।
नालंदा यानी विश्व का पहला विश्वविद्यालय। जहां दस हजार छात्र और दो हजार शिक्षक थे। यहां विश्व के प्रख्यात शिक्षक और छात्र पढ़े। गुप्त वंश द्वारा स्थापित इस विश्वविद्यालय को 1193 में तुर्क सेनापति बख्तियार खिलजी ने महज इसलिए आग लगा दी कि खिलजी का हकीम उसका इलाज नहीं कर सका, जबकि नालंदा के हकीम ने उसे ठीक कर दिया था। खिलजी को ईष्र्या हो गयी कि नालंदा का ज्ञान नहीं भाया और उसने वहां आग लगा दी। कहा जाता है कि नालंदा विश्वविद्यालय में 90 लाख पांडुलिपियां थीं जो कि तीन महीने तक जलती रही। क्या मोदी जी भी उसी सोच के तहत आगे बढ़ रहे हैं। जेएनयू में देश का बेस्ट ब्रेन है। नैक ने जेएनयू को 4 में से 3.9 की रैंकिंग दी है। ऐसे में इस विश्वविद्यालय पर मोदी सरकार की तिरछी नजरें क्यों हैं, क्या इसलिए कि यहां का बेस्ट ब्रेन मोदी सरकार की शरण में नहीं है। क्या इसलिए कि यहां का बेस्ट ब्रेन मोदी सरकार और भाजपा की चाटुकारिता नहीं करता। नकली राष्ट्रवाद पर नहीं पिघलता? मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल करता है, जो मोदी सरकार को पंसद नहीं! ऐसे में जेएनयू पर फिर वही खतरा मंडरा रहा है जो नालंदा पर मंडराया था।
... तो नालंदा का इतिहास दोहराएगा जेएनयू!