...वो 47.2 किमी L-94 खौफनाक सड़क

.नरेंद्रनगर से चम्बा का जानलेवा सफर .


प्रकृति के साथ हो रही है भयानक छेड़छाड़


लोकनिर्माण विभाग और नेशनल हाईवे प्राधिकरण ने निजी लाभ के मद्देनजर इस सड़क को भी महामार्ग के प्रोजेक्ट में शामिल कर दिया गया और इस सड़क जो कि राष्ट्रीय महामार्ग-94 के नाम से जाना जाता है, नरेंद्रनगर-चम्बामार्गसे ग्राउंडजीरो रिपोर्ट नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी निर्माण के दौरान पेड़ों के कटान निस्तारण को लेकर गाइडलाइन तैयार और हाईवे अथारिटी को स्पष्ट आदेश कि मलबे का निस्तारण इस तरह को नुकसान न हो, लेकिन विडम्बना इसकी किसी को परवाह नहीं है। निर्माणाधीन हाईवे के ऊपर और नीचे दोनों ओर की बलि ले ली गई है दारनाथवर्ष 2013116-17 जूनकीरात। हजारों लोग अकाल मौत के ग्रास बन गये। यह प्रकृति का मानवीय छेड़छाड़ का बदला माना गया। तब पूरे बहस छिड़ी कि क्या हमें प्रकृति के साथ इस तरह से छेड़छाड़ करने का अधिकार है कि वह इतना भयानक बदला लें। वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने भी इस माना है कि यदि प्रकृति के साथ अधिक मानवीय हस्तक्षेप होता है तो प्रकृति अलगही ढंगसे अपना रौद्ररूपदिखाती हैहिमालय है सबसे जवान पहाड़ विश्व में हिमालय ही सबसे अधिक जवान पहाड़ है। यह पहाड़ अब भी बदल यूरेशिया और इंडियन प्लेटों के टकराव से यहां घाटियां बन रही हैं। प्लेट टकराकर मुड़ रही हैं और घाटियां बन रही हैं। हर्षिल के निकट सुक्खा टॉप जैसे बड़े बन रहे हैं और यही कारण है कि चारधाम महामार्ग निर्माण का विरोध हो रहा है, यह सीधे तौर पर कच्चापहाड़कोदरकने कान्योता है। 12 हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के लिए न तो जियोलॉजिकल सर्वे ही किया गया और न ही मिट्टी और का ही परीक्षण किया गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि एक सड़क को बनाने के र स्थिर होने में लगभग 25 साल लग जाते हैं। ऐसे में जब कोई काम अनावश्यक हो गुणानन्द जखमोला वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र नगर से चम्बा तक मार्ग जब टिहरी झील का निर्माण कार्य चल रहा था तो नरेंद्र नगर से 47.2 किलोमीटर की सड़क को 14 मीटर चौड़ा कर दिया गया था। लोकनिर्माण विभाग और नेशनल हाईवेप्राधिकरणने निजीलाभके मद्देनजर को भी महामार्ग के प्रोजेक्ट में शामिल कर दिया गया और इस सड़क पहाड काटने के कोई मानक नहीं तरह से टूटी-फूटी है और पहाड़ कटने से बड़े-बड़े सकता है। कार्यदायी संस्था ने कई स्थानों पर मलबा चोपड़ियाल के निकट पहाड़ को बेतरतीब ढंग से बोल्डर सड़क पर आ गये हैं। जेसीबी को नदी में उतारा सड़क पर न गिरे इसके लिए लोहे की जालियां लगाई हैं जा रहा था। पहाड़ कैसे काटने हैं, इसका कोई गया है और वहां से पुल बनाने की कवायद हो रही है। लेकिन वो नाकाफी साबित हो रही हैं। जालियां तोड़ कर तकनीकी मानक नहीं था। जेसीबी चालक जहां तक इस कार्य में चार महीने से भी अधिक का समय लग बोल्डरसड़क पर आरहे हैं। वहां तक पहाड़ को काट रहा था। यहां भी कई सकता हैहिन्डोलाखाल में भी पर सड़क पर पैच वर्क बाकी था। उपली और बेमर में डंपिंग जोन जान मुसीबत में में भी पहाड़ की कटाई हो रही है। नागनी के निकट और क्रशर मुसीबत आगराखाल और नरेंद्र नगर के बीच पर बोल्डर ही बोल्डर हैं। पहाड़ से भी बोल्डर नेशनल हाईवे 94 के तहत बेमर में क्रशर लगाया हिन्डोलाखाल में वाहन चालकों और सवारियों की जान की आशंका है। आमसेरा के निकट सभी होटल गया है ताकि सड़क की सुविधा के लिए रोड़ी-कंकरीट सांसत में होती है। यहां पहाड़ का कटान होने से ऊपर से दिये गये हैं। हालांकि सड़क किनारे कुछ नए होटल __ की आपूर्ति की जा सके, लेकिन यहां के निकट जोडंपिंग बड़े-बड़े बोल्डर गिर रहे हैं। यह इलाका बदरीनाथ हाइर्व हो गये हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का रोजगार बुरी __ जोन बनाया गया है वह बता रहा है कि यहां कोई कानून पर सिरोबगड़की याद दिलाता है। प्रभावित हुआहै।आमसेरा निवासी राहुलभंडारी का भय नहीं है और न ही कार्यदायी संस्था को ही इसकी यहां दोनों ओर कर्मचारी ट्रैफिक की आवाजाही कहना है कि विगत एक साल से दुकानदारी चौपट हो परवाह है। डंपिंग जोन से सैकड़ों फुट नीचे सफाचट के लिए सिंग्नल देते हैं लेकिन साथ ही चेतावनी देते हैं कि ।आगेक्या होगा, कहानहीं जासकताहै। पहाड़ी बन गयी है। बोल्डर गिर जाएं तो हम जिम्मेदार नही? यदि निर्माणधीन खाड़ी अब भी सबसे बदहाल वहां एक भी पेड़ नहीं है। फकोट में जो पहाड़ियां सड़क पर कोई हादसा होता है तो क्या इसके लिए वाहन खाड़ी में पहाड़ कटरहेहैं, नदी पर पुल बन रहा है कटी हैं वोसीधे तौर पर मौत कोन्योतादेतीप्रतीत होती हैं। चालकको दोषी ठहरायाजासकता है? लेकिन सब चल यहां नदी की धारा को रोकने या बदलने का प्रयास पहाड़ियां कटने से गंजी हो गयी हैं और चोटी पर पेड़ कभी रहा है। नरेंद्रनगर तक निर्माणाधीन नेशनल हाईवे का है। यहां लगभग आधा किलोमीटर सड़क बुरी भी गिर सकते हैं और उनके साथ भारी मलबा नीचे आ बुरा हाल है।।